Sunday, 23 December 2012

ऐसा देश है मेरा


ऐसा देश है मेरा ...
जिसपे हर 26 जनवरी को मै इतराती हु 
और कितनी ही बार भारतीय होने पे शर्मिन्दा हो जाती हु 

अपना ही अपने को खा रहा 
जब घर का ही भेदी लंका ढाए 
तो हनुमान को काहे बुलाये 

इस देश की सरकार सोती है 
जब एक लड़की सड़क पे नंगी पड़ी होती है 
और जागती है जब इलेक्शन की बारी होती है 

यहा इंसान मे इंसान नहीं मिलता 
पागल लोग पत्थर मे भगवन धुनधते हैं 
और जिन्दा लड़की को कुत्तो की तरह नोचते हैं 

पुलिस हमारी रक्षा में 24 घंटे खड़ी  है 
बस इतना अफ़सोस है वो कही और कड़ी है 
और हम कही और 

कहने को बड़ी बड़ी बातें है 
मगर वो बस बातें है 

नशे मे डुबे जेहन है 
नज़रो में केवल हवस है 

इन्सान की कीमत नहीं 
इन्साफ की देवी अंधी हुई पड़ी है 
कानून के हाथ  पैसो से भर चुके है 

यहाँ  मुलजिम रास्तो पर आजाद बेफिकर है 
और आम आदमी डरा सहमा पडा है 

ना औरत का सम्मान है 
ना सच कहने का अधिकार है 
आम आदमी होना यह सबसे बड़ा पाप है 






Friday, 14 December 2012

इस बार लडूंगी मै ...


बस अब बोहत हुआ ,
इस बार लडूंगी मै ,
अब ना पीछे हटूंगी मै 
उन टूटे हुए सपनो के लिए ,
उस रोंदे हुए मान के लिए,
उन भुझी हुई आँखों के लिए 


लडूंगी उस वक्त से जिसने ला छोड़ा इस दोराहे पर ,
और चल दिया मुह फेर के 
बस मगर अब बोहत हुआ 
इस बार लडूंगी मै 

उस रूठी हुई रुत से,
तेरी बातों की जिद से 
नहीं मानूंगी इसे मुकदर मै 
इस किस्मत की लकीर को 
खुद ही लिखूंगी मै 

अब और ना सुनूंगी मै 
तोडूंगी गी सारी बंदिशे 
अपने पर खोलूंगी मै 
उन दबे हुए अल्फाजो के लिए 
वो हर बात कहूंगी  मै ,
इस बार लडूंगी मै ,

कुछ पाने की आस मे कितना कुछ खो चुकी हु मै 
उन जूठे रिश्तो की आग मै ,जिनमे झुलस गयी हु मै 
बस अब ,और ना  सहूंगी मै 
इस बार लडूंगी मै 

वो सिसकिया जो दब गयी ,
वो रातें जो आँखों में कट गयी,
एक सुबह के इंतजार मे ,
अब और ना रुकुंगी मै 
इस रात को ही रोशन करुँगी मै 
क्यूंकि, इस बार लडूंगी मै .