Friday, 14 December 2012

इस बार लडूंगी मै ...


बस अब बोहत हुआ ,
इस बार लडूंगी मै ,
अब ना पीछे हटूंगी मै 
उन टूटे हुए सपनो के लिए ,
उस रोंदे हुए मान के लिए,
उन भुझी हुई आँखों के लिए 


लडूंगी उस वक्त से जिसने ला छोड़ा इस दोराहे पर ,
और चल दिया मुह फेर के 
बस मगर अब बोहत हुआ 
इस बार लडूंगी मै 

उस रूठी हुई रुत से,
तेरी बातों की जिद से 
नहीं मानूंगी इसे मुकदर मै 
इस किस्मत की लकीर को 
खुद ही लिखूंगी मै 

अब और ना सुनूंगी मै 
तोडूंगी गी सारी बंदिशे 
अपने पर खोलूंगी मै 
उन दबे हुए अल्फाजो के लिए 
वो हर बात कहूंगी  मै ,
इस बार लडूंगी मै ,

कुछ पाने की आस मे कितना कुछ खो चुकी हु मै 
उन जूठे रिश्तो की आग मै ,जिनमे झुलस गयी हु मै 
बस अब ,और ना  सहूंगी मै 
इस बार लडूंगी मै 

वो सिसकिया जो दब गयी ,
वो रातें जो आँखों में कट गयी,
एक सुबह के इंतजार मे ,
अब और ना रुकुंगी मै 
इस रात को ही रोशन करुँगी मै 
क्यूंकि, इस बार लडूंगी मै .


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