ऐसा देश है मेरा ...
जिसपे हर 26 जनवरी को मै इतराती हु
और कितनी ही बार भारतीय होने पे शर्मिन्दा हो जाती हु
अपना ही अपने को खा रहा
जब घर का ही भेदी लंका ढाए
तो हनुमान को काहे बुलाये
इस देश की सरकार सोती है
जब एक लड़की सड़क पे नंगी पड़ी होती है
और जागती है जब इलेक्शन की बारी होती है
यहा इंसान मे इंसान नहीं मिलता
पागल लोग पत्थर मे भगवन धुनधते हैं
और जिन्दा लड़की को कुत्तो की तरह नोचते हैं
पुलिस हमारी रक्षा में 24 घंटे खड़ी है
बस इतना अफ़सोस है वो कही और कड़ी है
और हम कही और
कहने को बड़ी बड़ी बातें है
मगर वो बस बातें है
नशे मे डुबे जेहन है
नज़रो में केवल हवस है
इन्सान की कीमत नहीं
इन्साफ की देवी अंधी हुई पड़ी है
कानून के हाथ पैसो से भर चुके है
यहाँ मुलजिम रास्तो पर आजाद बेफिकर है
और आम आदमी डरा सहमा पडा है
ना औरत का सम्मान है
ना सच कहने का अधिकार है
आम आदमी होना यह सबसे बड़ा पाप है
No comments:
Post a Comment